बुधवार, 14 जुलाई 2010

आईं ऍम द बेस्ट
नारियां ये मानने से इतना घबराती क्यूँ हैं ?? विनम्र होना एक बात हैं लेकिन उस विनम्रता का क्या फायदा जो आप को अपने को दुसरो से श्रेष्ठ ना समझने दे । श्रेष्ठ होने मे और और घमंडी होने मे बहुत अंतर हैं । आप कि शेष्ठ्ता आप को हमेशा ऊपर जाने को प्ररित करती हैं और आप के अन्दर एक "ताकत " बनती हैं । आप कि यही ताकत आप को औरो से अलग करती हैं और उनसे बेहतर बनाती हैं । अपने को बेहतर मानने मे इतना संकोच क्यूँ । जब तक आप अपने को श्रेष्ठ नहीं मानेगे तब तक क्या दूसरे आप को श्रेष्ठ मानेगे । अगर कोई आप को कहता हैं " आप दुसरो से बेहतर हैं " तो उसको धन्यवाद कह कर आप और बेहतर बनने कि कोशिश कर सकते हैं { अहम् को आड़े ना आने दे } ।
आज के समय मे श्रेष्ठ और बेहतर होना सफलता कि कुंजी हैं । Nothing succeeds like success
को जो लोग समझ लेते हैं वो हर जलजले , तूफ़ान , सुनामी से ऊपर उठ जाते हैं और अपनी श्रेष्ठ्ता को बार बार अपने आप को ही सिद्ध करते हैं ।

पढ़ा था
क्षमा शोभती उस भुजंग को जिसके पास गरल हो
उसको क्या जो दन्त हीन विष रहित विनीत सरल हो

11 टिप्‍पणियां:

  1. सुंदर आलेख। हिन्दी ब्लाग जगत में आप का स्वागत है।

    और ये शब्द पुष्टिकरण हटाएँ।

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  2. आपका नजरिया और उसको समर्थन देती पंक्तियाँ:
    "क्षमा शोभती उस भुजंग को जिसके पास गरल हो
    उसको क्या जो दन्त हीन विष रहित विनीत सरल हो"
    बहुत खूब

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  3. हा बात तो सच है..... सुन्दर लेख है आप का !

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  4. हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
    कृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढें और अपनी बहुमूल्य टिप्पणियां देनें का कष्ट करें

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  5. apni aatmik shkti ko phchanna our uspe grv krna hr kisi ko aana hi chahiye . khas kr ourto ko jo bhut jldi pristhitiyon ke aage apne ko ashj mhsoos krti hai .
    bhut achchhi post .

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  6. चलिए इसी बहाने महिलाए कुछ सीखेंगी...अच्छा लिखा है http://merajawab.blogspot.com
    http://kalamband.blogspot.com

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  7. इस नए चिट्ठे के साथ हिंदी ब्‍लॉग जगत में आपका स्‍वागत है .. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं !!

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  8. अच्छा लिखा है आपने। विषय का विवेचन और भाषिक संवेदना प्रभावित करती है।
    मेरे ब्लाग पर राष्ट्रमंडल खेलों में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने के संदर्भ में अपील है। उसे पढ़ें और अपनी प्रतिक्रिया देकर बताएं कि राष्ट्रमंडल खेलों में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने की दिशा में और क्या प्रयास किए जाएं।
    मेरा ब्लाग है-
    http://www.ashokvichar.blogspot.com

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